कृषक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड – विश्‍व की प्रमुख उर्वरक उत्‍पादक सहकारी संस्‍था


 



Joomla Slide Menu by DART Creations
हमारे बारे में रूपरेखा

रूपरेखा

सोमवार, 04 जुलाई 2011 11:31
मुद्रण पीडीएफ़

कृषक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड (कृभको), बहुराज्‍यीय सहकारी समिति (एमएससीएस) अधिनियम, 2002 (2002 का 39) के अन्‍तर्गत पंजीकृत एक बहुराज्‍यीय सहकारी समिति है। इस समिति की सहकारी क्षेत्र में एक उर्वरक उत्‍पादन ईकाई है जो भारत सरकार के नियमों (व्‍यवसाय आबंटन) के नियम 3 की अनुसूची ।। की मद सं. 5 के अनुसार उर्वरक विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है। कृभको मुख्‍यत: उर्वरक उत्‍पादक सहकारी समिति है जिसका गुजरात राज्‍य के हजीरा (सूरत) में उर्वरक संयंत्र है । इस संयंत्र की 4.65 लाख मी. टन अतिरिक्‍त यूरिया उत्‍पादन क्षमता बढ़ाने के लिए रिवेम्पिंग की जा रही है । रिवेम्‍प के पश्‍चात संयंत्र की कुल यूरिया उत्‍पादन क्षमता बढ़कर 21.65 लाख मी.टन हो जाएगी ।

कृभको ने लाजिस्टिक व्‍यवसाय, ओमान इंडिया फर्टिलाइजर काम्‍पलैक्‍स (ओमिफको), विद्युत क्षेत्र,  बीमा क्षेत्र आदि में भी विविधीकरण किया है । ओमिफको, कम्‍पनी की विदेश में पहली संयुक्‍त उद्यम परियोजना है, जिसमें कृभको की शेयरधारिता 25% है। इसके अतिरिक्‍त, कृभको ने उदारीकृत/वैश्‍वीकृत अर्थव्‍यवस्‍था की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी कारपोरेट नीति में भी बदलाव किया है और आंतरिक प्रचालन रिवेम्पिंग का कार्य किया है। इसके परिणामस्‍वरूप, हानि में चल रहे कृषक भारती सेवा केन्‍द्र (केबीएसके) एवं बीज संसाधन ईकाइयां (एसपीयू) लाभ कमाने वाले केन्‍द्र बन गए।

समिति का विपणन प्रभाग, अपने हजीरा स्थित संयंत्र में वर्ष 1986 से 18.00 लाख मी.टन वार्षिक उत्‍पादित यूरिया के विपणन के अतिरिक्‍त, वर्ष 2005-06 से ओमिफको  (इस कम्‍पनी की कृभको एक प्रवर्तक कम्‍पनी है) में उत्‍पादित 10.00 लाख मी.टन वार्षिक उत्‍पादित यूरिया के विपणन एवं हैंडलिंग का कार्य भी करता है। कृभको ने वर्ष 2006 में अपनी संयुक्‍त उद्यम कम्‍पनी  केएसएफएल इस संयुक्‍त उद्यम में कृभको की 85% शेयरधारिता है) के माध्‍यम से शाहजहांपुर फर्टिलाइजर काम्‍पलैक्‍स का भी अधिग्रहण किया है। इस संयंत्र में प्रति वर्ष उत्‍पादित लगभग 10.00 लाख मी.टन  यूरिया का विपणन भी वर्ष 2006 से कृभको द्वारा किया जा रहा है । वर्तमान में कृभको प्रतिवर्ष लगभग 38.00 लाख मी.टन यूरिया का विपणन कर रहा है जोकि देश की कुल यूरिया खपत का लगभग 14% है । समिति का विपणन प्रभाग हजीरा स्थित संयंत्र के रिवेम्‍प के पश्‍चात अगले वर्ष से 5.00 लाख मी.टन वार्षिक अतिरिक्‍त उत्‍पादित होने वाले यूरिया के विपणन के लिए भी पूर्णत: तैयार है।

उर्वरक उद्योग ने विशेषत: स्‍वदेशी उत्‍पादकों के लिए एनपीएस चरण-111 पालिसी और एनबीएस (1.4.2011 से) के कार्यान्‍वयन में महत्‍वपूर्ण बदलाव किए हैं। प्रेरक और स्थिर नीति के अनुरूप कृभको डीएपी एवं एमओपी जैसे अन्‍य उर्वरकों का आयात और विपणन करती है। वर्ष 2010-11 के दौरान समिति की योजना लगभग 4.00 लाख मी.टन डीएपी आयात करने और उसका विपणन करने की है। समिति की अगले तीन वर्षों में डीएपी और एमओपी का आयात बढ़ाकर लगभग 9.00 लाख मी.टन प्रतिवर्ष करने की योजना है।

कृषि उत्‍पादन बढ़ाने में गुणवत्‍ता बीजों के महत्‍व को देखते हुए कृभको ने वर्ष 1990-91 में बीज बहुलीकरण कार्यक्रम की शुरूआत की ताकि किसानों को उत्‍तर प्रदेश , पंजाब तथा हरियाणा राज्‍यों में स्थित कृषक भारती सेवा केन्‍द्रों के माध्‍यम से फसलों के उच्‍च गुणवत्‍ता वाले बीज और पब्लिक हाइब्रिड (पब्लिक किस्‍में) किस्‍में उपलब्‍ध कराई जा सकें। कृभको बीजों के प्रति किसानों के उत्‍साह को देखते हुए समिति ने 6 राज्‍यों में 14 उत्‍पादन ईकाइयां स्‍थापित की हैं । समिति ने बीजों का उत्‍पादन वर्ष 1991-92 में 2926 कुंतल से बढ़ाकर वर्ष 2009-10 में 2.29 लाख कुंतल कर दिया। अगले 3-5 वर्षों में कृभको की योजना प्रमाणित बीजों का उत्‍पादन और विपणन बढ़ाकर लगभग दोगुना करने की है।

देश में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जैव उर्वरकों और बायो कम्‍पोस्‍ट के प्रयोग को बढ़ावा देने जैसे कई कदम उठाए हैं। कृभको कई वर्षों से जैव-उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा दे रहा है। समिति ने हजीरा (गुजरात) वाराणसी (उत्‍तर प्रदेश) और लांजा (महाराष्‍ट्र) में तीन जैव उर्वरक उत्‍पादन ईकाइयां स्‍थापित की हैं। कृभको सभी 4 लोकप्रिय जैव उर्वरकों जैसे राइजोबियम, अजोटोबेक्‍टर, अजोसप्रीलियम तथा फास्‍फेट सोलुबल का उत्‍पादन और विपणन का कार्य करता है। समिति की योजना वर्ष 2010-11 के दौरान लगभग 1000 मी.टन जैव-उर्वकों की बिक्री करने की है, जिसे अगले 3-5 वर्षों में बढ़ाकर लगभग 1200 मी.टन किया जाएगा।

जैविक खेती भूमि की घटती उर्वरा शक्ति के व्‍यवहार्य विकल्‍प के रूप में उभरा है। भारत सरकार के निदेशानुसार सभी उर्वरक आपूर्तिकर्ताओं से अपेक्षा है कि वे बायो कम्‍पोस्‍ट के प्रयोग और विपणन को सक्रियता से बढ़ावा देंगे। बायो कम्‍पोस्‍ट के विपणन के लिए कृभको के पास पर्याप्‍त कर्मचारी हैं और बायो कम्‍पोस्‍ट के विपणन के लिए विश्‍वसनीय ब्रांड छवि है । इससे समिति को अतिरिक्‍त लाभ मिलने में मदद मिलेगी। वर्ष 2010-11 के दौरान हमारी योजना लगभग 19000 मी.टन बायो कम्‍पोस्‍ट की बिक्री करने की है जो अगले 3 वर्षों में बढ़कर लगभग 50,000 मी.टन तक होने की आशा है।

संक्षेप में, कृभको विश्‍व की एक ऐसी अग्रणी उर्वरक उत्‍पादक सहकारी संस्‍था है जिसने अपने प्रत्‍येक कार्यक्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट कीर्तिमान स्‍थापित किए हैं। कृभको ने सहकारी भावना को पूर्णरूप से आत्‍मसात कर लिया है और देश में आधुनिक कृषि एवं सहाकरी समितियों के सम्‍वर्द्धन में निरन्‍तर प्रयास किए हें। कृभको अपनी वचनबद्धता, सदभाव और उच्‍च कोटि की श्रेष्‍ठता के लिए जाना जाता है। लक्ष्‍यों को हासिल करने के हमारे प्रयासों में पूर्व अधिकारियों द्वारा स्‍थापित आदर्शों की प्रेरणा तथा कर्मचारियो की निष्‍ठा और समर्पण भाव समाहित है।

संकल्‍पना
विश्‍व स्‍तर का एक ऐसा संस्‍थान बने जो किसानों का प्रतिनिधित्‍व करे और जो कृषि आदानों, ग्रामीण आवश्‍यकताओं पर आधारित उत्‍पादों और अन्‍य विविध व्‍यवसायों में विशिष्‍टता प्राप्‍त करके किसानों को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ अपने अंशधारकों को भी अधिकतम लाभ पहुंचाए।

लक्ष्‍य
कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए ऐसी परियोजनाओं का चयन, वित्‍त पोषण एवं प्रबंधन करने में उत्‍प्रेरक के रूप में कार्य करना जो सामाजिक रूप से वांछित होने के साथ-साथ वाणिज्यिक रूप से लाभदायक हों।

उद्देश्‍य

  1. सहकारी प्रणाली को सुदृढ़ बनाना।
  2. यूरिया की संस्‍थापित उत्‍पादन क्षमता में वृद्धि करना और इसका बाजार में हिस्‍सा बढ़ाना।
  3. मौजूदा संयंत्र और मशीनरी का सर्वोत्‍तम उपयोग सुनिश्चित करना।
  4. बिजली, पत्‍तन (पोर्ट) अवसंरचना (इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर), ग्रामीण खुदरा (रिटेल) आदि अन्‍य मुख्‍य क्षेत्रों में विविधीकरण करना।
  5. आधुनिक खेती के लिए तकनीक अंतरण करना और किसानों की आजीविका में सुधार लाना।
  6. किसानों को शिक्षित एवं प्रशिक्षित करना और उन्‍हें मिट्टी के पोषक तत्‍वों और सिंचाई के पानी की मुफ्त परीक्षण सुविधा उपलब्‍ध कराना।

 

 

अंतिम बार अपडेट हुआ सोमवार, 16 अप्रैल 2012 11:00