कृषक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड – विश्‍व की प्रमुख उर्वरक उत्‍पादक सहकारी संस्‍था


 



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हमारे बारे में प्रबंधन सतर्कता

सतर्कता

समिति सतर्कता को प्रबंधन कार्य का एक अभिन्‍न अंग समझती है । कारपोरेट कार्यालय में पदस्‍थ मुख्‍य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) समिति द्वारा किए जा रहे सतर्कता प्रयासों के संबंध में दिशा निर्देश, मार्गदर्शन देते हैं और उनका निरीक्षण करते हैं। उन्‍हें फंक्‍शनल निदेशक का स्‍तर, पद और अनुलाभ प्रदान किए गए हैं। मुख्‍यालय, संयंत्र तथा आंचलिक कार्यालयों में सतर्कता अधिकारी नियुक्‍त किए गए हैं ।

सतर्कता विभाग ने भ्रष्‍टाचार मुक्‍त प्रशासन प्रदान करने के लिए प्रोएक्टिव दृष्टिकोण अपनाया है। रोधात्‍मक सतर्कता की नीति तैयार की गई और लागू की गई ताकि ईमानदारी का वातावरण विकसित किया जा सके और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाने के लिए नैतिक मूल्‍यों को प्रोत्‍साहित किया जा सके। आमजनता को उनकी शिकायतें, यदि कोई हैं दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों से सम्‍पर्क करने का अधिकार देने की दिशा में कदम उठाए गए हैं ।
सतर्कता विभाग प्रणाली में सुधार लाने और उसे सरल बनाने तथा समिति का लक्ष्‍य प्राप्‍त करने के प्रति समिति की निर्बाध कार्यशैली के लिए नियमों और प्रक्रियाओं का कोडिफि‍केशन करने का कार्य करता है। सभी स्‍तरों पर स्‍वतंत्र रूप से कार्य करने और निर्णय लेने की संस्‍कृति को निरंतर सुदृढ़ बनाया जा रहा है। समिति ने निदेशक मंडल द्वारा सतर्कता कार्यकलापों की छमाही समीक्षा करने की प्रणाली लागू की है ।
समिति के बौद्धि‍क पूंजी आधार में सुधार लाने की दृष्टि से सतर्कता सेमिनार आयोजित किए जाते हैं और अधिकारियों को देश के सुप्रसिद्ध सतर्कता अधिकारियों के विचारों से अवगत कराया जाता है ।
सतर्कता विभाग का यह प्रयास है कि सभी कर्मचारियों में संगठनात्‍मक नागरिकता की भावना उत्‍पन्‍न हो ताकि संगठनात्‍मक लक्ष्‍य प्राप्‍त करने में नियमों और प्रक्रिया का स्‍वैच्छिक अनुपालन हो ।
समिति में सकारात्‍मक अनुशासन बनाने के लिए कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली अनियमितताओं के लिए दण्‍डात्‍मक सतर्कता को एक प्रबंधन औजार के रूप में इस्‍तेमाल किया जाता है । समिति के विजन को प्राप्‍त करने में योगदान देने के लिए एक नीतिगत कार्रवाई योजना लागू की जा रही है ।

तीन स्‍तरीय सतर्कता नीति

क) जागरूकता कार्यक्रम
* सेमिनार, कार्यशाला, व्‍याख्‍यान तथा वाद विवाद कार्यक्रम आयोजित करना।
* केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग/सरकार के अनुदेश परिचालित करना।
* सतर्कता जागरूकता पर इन-हाउस विशेष पत्रिका जारी करना।
* विशेष मामलों की अध्‍ययन रिपोर्ट कर्मचारियों के ध्‍यान में लाना।

ख) रोधात्‍मक सतर्कता

* नियमों और प्रक्रियाओं का सरलीकरण।
* स्‍वनिर्णय के दुरूपयोग के क्षेत्र को कम करना।
* भ्रष्‍टाचार के बिन्‍दुओं को घटाने के लिए प्रणाली/प्रक्रिया की खामियों का पता लगाना।
* कार्यप्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को बढ़ाना।
* शिकायतों को त्‍वरित गति से निपटाने के लिए प्रभावी तंत्र लागू करना।
* नियमित तथा औचक निरीक्षण करना।
* भ्रष्‍टाचार के तरीकों का पता लगाने के लिए संगठन में निपटाए जाने वाले मामलों की मानीटरिंग करना।
* जन-सम्‍पर्क बिन्‍दुओं की प्रभावी निगरानी करना।
* कर्मचारियों में ईमानदारी के सर्वोच्‍चय मानक उपलब्‍ध कराने के लिए कदम उठाना।

ग) दण्‍डात्‍मक सतर्कता
* सतर्कता मामलों और अनुशासनात्‍मक जांच पड़ताल का तेजी से निपटान।
* सकारात्‍मक अनुशासन बनाए रखने के लिए कदम उठाना।

सतर्कता मामलों में तीव्र कार्रवाई करने के लिए अन्‍य एजेंसियों के साथ निकट सम्‍पर्क बनाना।

KRIBHCO’s Vigilance Department is headed by श्री ए के गुप्‍ता, आईएएस, मुख्‍य सतर्कता अधिकारी .

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