

कृषक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड – विश्व की प्रमुख उर्वरक उत्पादक सहकारी संस्था

पर्यावरण कृभको के लिए सदैव सर्वोच्च महत्व का विषय रहा है । समिति पर्यावरण को बचाने के अपने दायित्व को समझती है और सर्वोत्तम प्रौद्योगिकी का उपयोग करके अपने कार्यकलापों को इस ढंग से संचालित करती है कि उनका पर्यावरण पर कम से कम विपरीत प्रभाव पड़े । दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए ‘कम करने, रीसाईकिलिंग तथा पुन:उपयोग’ के सिद्धांत पर आधारित विस्तृत संरक्षण योजना अपनाई गई है ।
संयंत्र चालू होने के समय से विभिन्न उपचार योजनाएं कार्यान्वित की गई हैं जिनके परिणामस्वरूप लगभग 40 प्रतिशत पानी की खपत में कमी आई है और पिछले सात वर्ष से अन्तिम आउट लैट से जीरो एफ्ल्यूएंट डिस्चार्ज हो रहा है । पानी की खपत में और कमी करने के प्रयास किए जा रहे हैं । सीवेज जल का तीन बार उपचार करके उसे कूलिंग वाटर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है । यूरिया संयंत्र में डीप हाइड्रोलाइजर लगाया गया है ताकि एफ्ल्यूएंट का उपचार करके उसका बायलर फीड वाटर के रूप में पुन: उपयोग किया जा सके ।
विभिन्न चिमनियों से निकलने वाली हवा को प्रदूषित करने वाले तत्वों की मात्रा नियामक निकायों द्वारा निर्धारित सीमा से काफी कम है । चिमनियों से निकलने वाले धुएं के प्रभाव की निरंतर निगरानी करने के लिए एक आटोमैटिक वायु गुणवत्ता केन्द्र स्थापित किया गया है । संयंत्र के आसपास के क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता की समय समय पर मानीटरिंग करने के लिए दस किलोमीटर के दायरे में वायु गुणवत्ता की मानीटरिंग के लिए 6 केन्द्र स्थापित किए गए हैं । प्रीलिंग टावर के शीर्ष पर वेट डी डस्टिंग सिस्टम लगाया गया है और यूरिया डस्ट तथा अमोनिया का वायुमण्डल में उत्सर्जन निधारित सीमाओं से काफी कम है ।
स्वच्छ और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने के लिए समिति ने वायुप्रदूषण सहनशील सूचकांक पर आधारित विभिन्न प्रजातियों के एक लाख से भी अधिक पेड़ लगाकर हरित पट्टी विकसित की है और इस प्रकार परिसर के भीतर की वायु की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलती है । सौ एकड़ क्षेत्र पर हरे भरे घास के मैदान भी विकसित किए गए हैं । इसके अतिरिक्त 41 एकड़ क्षेत्र में खेत प्रदर्शन का विकास किया गया है ।
ठेका मजदूरों में जागरूकता पैदा करने के लिए पर्यावरण संरक्षण मापदंड वीडियो तैयार किया गया है जिसे सभी ठेका मजदूरों को दिखाया जाता है और उसके बाद ही उन्हें संयंत्र परिसर में कार्य करने की अनुमति दी जाती है ।
कारपोरेट सामाजिक दायित्व के एक भाग के रूप में समिति ने ग्रामों को अंगीकार किया है और विभिन्न सामुदायिक कल्याण और विकास कार्यक्रम जैसे पेय जल आपूर्ति, वृक्षारोपण, सड़क, चैक बांधों का निर्माण आदि चलाए जाते हैं ।
समुद्री तथा तटीय पर्यावरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए समिति ने भरूच जिले के कांतियाजल गांव की 100 हैक्टेयर भूमि पर मेंगरोव के पौधे लगाने के लिए 30 जून, 2010 को गुजरात पारिस्थितिकी आयोग, गांधीनगर के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं । मेंगरोव एक बहुत मूल्यवान पौधे की प्रजाति है और इससे तटीय तथा समुद्री क्षेत्र के अत्यधिक महत्वपूर्ण इको सिस्टम बनाने में मदद मिलती है ।
टाउनशिप निवासियों और स्कूल के बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जाता है ।
सुदृढ़ पर्यावरण प्रबंधन के प्रति समिति की निरंतर प्रतिबद्धता की व्यापक सराहना हुई है और समिति को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं ।