कृषक भारती कोआपरेटिव लिमिटेड – विश्‍व की प्रमुख उर्वरक उत्‍पादक सहकारी संस्‍था


 



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उत्‍पाद व सेवाएं बीज हाइब्रिड बीज

हाइब्रिड बीज –बीटी काटन का प्रारम्‍भ

मुद्रण पीडीएफ़

वर्तमान में, घरेलू हाइब्रिड बीज बाजार लगभग 3000 करोड़ रुपये वार्षिक है जिसकी विकास दर लगभग 10 प्रतिशत वार्षिक है जबकि वैश्विक विकास दर 5 प्रतिशत वार्षिक है। हाइब्रिड बीज का व्‍यवसाय बढ़ने की भारी संभावना को देखते हुए तथा मौजूदा विकास श्रृंखला को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्‍य से कृभको ने वर्ष 2010-2011 से हाइब्रिड बीजों का विपणन करना शुरू किया है और इस वर्ष इस व्‍यवसाय से 14.00 करोड़ रुपये का कारोबार करने की योजना है । कृभको हाइब्रिड बीज के प्रति किसानों ने अच्‍छी रूचि दिखाई है और समिति का अगले वर्ष हाइब्रिड बीज का लगभग 150 करोड़ रुपये का कारोबार करने का लक्ष्‍य है।

कृभको ने प्रतिष्ठित हाइब्रिड बीज उत्‍पादकों के साथ नीतिगत साझेदारी की है।

फसल उत्‍पादकता में हाइब्रिड बीजों का महत्‍व

उत्‍पादकता बढ़ाने में हाइब्रिड बीजों की भूमिका अब सर्वविदित है । हाइब्रिड प्रौद्योगिकी खाद्यान्‍न उत्‍पादन में दूसरी हरित क्रांति के अनुकूल है जोकि तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्‍या की चुनौतियों का सामना करने के लिए जरूरी है। अन्‍य कृषि आदानों जैसे उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई की कार्यक्षमता अधिकतर बीजों की गुणवत्‍ता पर निर्भर करती है जिससे उत्‍पादकता में 20-25 प्रतिशत का असर पड़ता है। इसलिए यह आवश्‍यक है कि सही विशेषता वाले उच्‍च गुणवत्‍ता के बीज किसानों को उपलब्‍ध कराए जाएं। गत चार दशकों से विशेषकर अच्‍छे हाइब्रिड और बीटी काटन के आगमन से निरन्‍तर बीजों की गुणवत्‍ता में सुधार हुआ है।

इतनी अच्‍छी प्रगति के होते हुए भी 26 मिलियन कुंतल गुणवत्‍ता बीजों की मांग की तुलना में लगभग 20 मिलियन कुंतल गुणवत्‍ता बीज ही उपलब्‍ध है।

हाइब्रिड बीजों के मामले में हर वर्ष अच्‍छे गुणवत्‍ता वाले बीज बदलने की आवश्‍यकता है । बीजों की गुणवत्‍ता में ह्रास से उत्‍पादकता की हानि होती है और इसलिए इसे बदलने की आवश्‍यकता होती है। बीटी काटन पर व्‍यापारीकरण से पहले और बाद में कई अध्‍ययन किए गए जिसके हितलाभ निम्‍नानुसार हैं:-

  1. टिण्‍डों पर कीड़ों के प्रभाव का नियंत्रण और कपास का अधिक उत्‍पादन
  2. रासायनिक कीटनाशी दवाओं के उपयोग में भारी कमी
  3. किसानों को अधिक मुनाफा और
  4. जैव नियंत्रण तत्‍वों का संरक्षण और अन्‍य लाभकारी जीवाणु

भारत में बीटी काटन की शुरूआत से पहले वर्ष 2002 में औसतन कपास उत्‍पादकता 308 कि.ग्रा. प्रति हेक्‍टेयर थी जो बढ़कर 2007 में 560 कि.ग्रा. प्रति हेक्‍टेयर हो गई (कम से कम 50 प्रतिशत की वृद्धि का श्रेय बीटी प्रोद्यौगिकी को जाता है)। इसी प्रकार राष्‍ट्रीय कपास उत्‍पादन जो वर्ष 2002 में केवल 15.8 मिलियन गांठें था, वर्ष 2007 में बढ़कर 31.0 मिलियन गांठें हो गया।

धान की अर्ध-बौनी अंत: प्रजात किस्‍म के अधिकतम उत्‍पादन से हाइब्रिड धान की पैदावार 15 से 20 प्रतिशत अधिक है। हाल ही में जारी की गई हाइब्रिड प्रजातियों में अच्‍छी गुणवत्‍ता का दाना, बीमारी/कीटनाशी रोधकता और एबायोटिक दबाव के प्रति सहिष्‍णु है। बढि़या हाइब्रिड की प्रगति से बीज उत्‍पादन पैकेज में सुधार और प्रभावकारी पब्लिक-प्राइवेट साझेदारी एवं देश में हाइब्रिड धान क्षेत्र में वृद्धि की भारी संभावना से भारत में उत्‍पादकता स्‍तर बढ़ाने के लिए एक लम्‍बा मार्ग तय करना होगा।

एकल क्रास (संकरण) मक्‍का हाइब्रिड बीज की स्‍वीकार्यता में वृद्धि हो रही है । एकल क्रास (संकरण) की अगले 3 वर्षों में लगभग 60 प्रतिशत पर एकल क्रास (संकरण) का उपयोग किया जाएगा।