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कृषक भारती सेवा केन्द्र
उद्देश्य : किसानों को सभी आवश्यक कृषि आदान उचित मूल्य पर, पर्याप्त मात्रा में और सही समय पर एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना । इसके माध्यम से किसानों को सेवाएं प्रदान की जाती हैं जैसे- नि:शुल्क कृषि तकनीक, नि:शुल्क कृषि उपस्कर, शीतल जल, कृषि पत्रिका, समाचार पत्र, किसान हैल्प लाईन, नि:शुल्क मिट्टी के नमूने लेना और उनकी जांच करना, किसानों के बैठने और पढ़ने के लिए स्थान उपलब्ध कराना, ऋण, फसल बीमा, सिंचाई तथा अन्य आदानों के संबंध में नि:शुल्क परामर्श देना । किसानों का नियमित आवागमन ।
( मुनाफा जरूरी परन्तु सेवा पहले )
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कार्बनिक : मिट्टी की उत्पादकता पर प्रभाव)
- मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है ।
- मिट्टी में अधिक समय तक नमी बनी रहती है ।
- मिट्टी में जड़ों तक वायु-मिश्रण ठीक तरह से होता है ।
- पौधों के पोषकों के लिए बेहतर पीएच की प्राइज़
- मिट्टी में सूक्ष्मजीवी क्रिया बेहतर ढ़ंग से होती है ।
अंतत: फसल उत्पादकता में सुधार होता है ।
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जैव उर्वरक : मिट्टी की उपजाऊ शक्ति पर प्रभाव
- मिट्टी की उत्पादकता में सुधार होता है ।
- राइजोबियम वायुमण्डल से नाइट्रोजन लेकर फलीदार फसलों में ठीक तरह से निर्धारित करता है ।
- अजोटोबैक्टर वायुमण्डल से नाइट्रोजन लेकर सभी प्रकार की मिट्टी में ठीक तरह से निर्धारित करता है ।
- पीएसबी फास्फोरस को घोलता है तथा इसकी उपलब्धता में वृद्धि करता है ।
जैव उर्वरक अंतत: रसायनिक उर्वरकों की मात्रा को कम करता है और इस प्रकार खेती की लागत को घटाता है । |